Monday, November 24, 2008

पेट की खातिर

पेट की खातिर ज़्यादातर बिहारियों की तरह ही घर से दूर...... कामकाज जो मिला सो कर रहा हूँ... इस बीच देश और दुनिया के गोरे शहरों को घूम-फ़िर के समझने बुझने की पेंच में लगा हुआ हूँ... देश से बाहर हूँ तो वक्त थोड़ा ज्यादा बच जाता है ... कटाने दौड़ाने लगा तो... मैंने सोचा उसका भी थोड़ा कटा जाए जो हमारा कटते आए हैं... लिविंग-रूम,ड्राइंग-रूम में बैठ के बहुत लोगों को गरियाये... और गरियाते हुए सुने... अब ख़ुद कुछ दोस्तों के साथ कुछ करने की कोशिश जारी है.... पर ये है थोड़ा ही मुश्किल कम से कम गलियाने से ... :)

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